रैन बसेरा

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करार-ए-दिल

Posted On: 18 Dec, 2015 कविता में

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उसकी पहलू में दिल को करार आता है
क्या कहूं मैं उसपे कितना प्यार आता है।

सुरमई शाम की खुशबू दिल को महका जाती है
उसके जुल्फ के साये में दिल-ए-नादां को करार मिलता है।

रात की स्याह तारीकीयों से अब दिल नहीं घबराता
हर रात उसके ख्वाब में आने का इंतजार रहता है।

इश्क के आदाब से यूं तो महरूम रहा हूं बरसों
उसके आ जाने से हर वक्त दिल में इश्क का खुमार रहता है।

न जाने क्यों लोग तंज कसा करते हैं मुझपर
न मालूम क्यों लोगों को मेरा इश्क नागवार लगता है।

जमाने भर के फित्नों से बच के रहना ‘सागर’
आजकल लोगों को प्यार से ज्यादा दुश्मनी का इंतजार रहता है।।



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