रैन बसेरा

हक बात, बुलन्द आवाज

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M. Afsar Khan


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दीप नहीं दिल जलेंगे खाली

Posted On: 9 Nov, 2015  
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हास्य व्यंग में

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बालश्रम की जंजीरों में सिसकता बचपन

Posted On: 7 Nov, 2015  
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social issues में

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होली : जीवन में नेकी के रंग बिखेरने का पर्व

Posted On: 15 Mar, 2014  
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तंत्र के शोर में गण मौन

Posted On: 25 Jan, 2014  
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साम्प्रदायिकता के दावानल को रोकने का वक़्त

Posted On: 13 Jan, 2014  
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दंगा पीड़ितों के जज्बात पर सपा का बुल्डोजर

Posted On: 3 Jan, 2014  
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कारवां गुजर गया और गुबार ही गुबार रहा…

Posted On: 18 Oct, 2013  
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आखिर क्यों?

Posted On: 12 May, 2013  
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के द्वारा: vikaskumar vikaskumar

के द्वारा: M. Afsar Khan M. Afsar Khan

के द्वारा: loveabhi loveabhi

के द्वारा: M. Afsar Khan M. Afsar Khan

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ना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बंधन, जब प्यार करे कोई तो देखे केवल मन । बिलकुल सही ख़यालात हैं आपके । आपकी बात बिलकुल ठीक है कि प्यार तो माँ, बाप, भाई, बहन आदि किसी के भी लिए हो सकता है । और वैलेंटाइन डे भी ऐसे हर तरह के प्यार को अभिव्यक्त करने के लिए है, केवल लड़के-लड़की के रोमांटिक प्यार को अभिव्यक्त करने के लिए नहीं । लेकिन अफ़सोस, हमारे यहाँ आधुनिकता के रंग में रंगे बहुत-से युवा प्यार का मतलब न जानते हैं और न समझना चाहते हैं । उनके लिए तो मौज-मज़ा ही सब कुछ है । वे वैलेंटाइन डे को भी उसे रूप में देखते हैं । लेकिन जो सच्चा प्यार करने वाले अपने प्यार के इज़हार के लिए इस दिन को चुनते हैं, उन्हें नैतिकता के ठेकेदारों का क़हर झेलना पड़ता है । कभी-कभी लगता है कि हिंदुस्तान में नफ़रत करने का हक़ तो सबको है, प्यार करने का किसी को नहीं । इसीलिए हमारे यहाँ अब नफ़रत की ही फसल लहलहाती है, प्यार की नहीं ।

के द्वारा: Jitendra Mathur Jitendra Mathur

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